चलो ना अब बांट ही लेते हैं !!
हर धर्म को, हर जाति को, हर प्रांत के #निवासी को!
हर एक दुर्भाव का झगड़ा आज निपटा ही लेते हैं,
चलो ना अब एक #तराजू लेकर, सब बांट ही लेते हैं।
पहले हम, इस तराजू पर #धर्म को ले लेते हैं,
हर धर्म के #धर्मग्रंथों का पूरा वजन कर लेते हैं,
किस धर्म के ईश्वर कितने बड़े हैं, किसके धर्मगुरु कितने लघु हैं,
इस पर फैसला आज हो ही जाना चाहिए!
हर धर्म का हिसाब आज हो ही जाना चाहिए।
पर उफ्फ, इस तराजू के पलड़े एकसार हुए जाते है!
सब धर्मग्रंथों का वजन #बराबर बताते हैं!
चलो ये किस्सा उन नासमझो को सुनाते हैं,
जो धर्म के नाम पर रोज हथियार उठाते है।
अब हम इस तराजू पर हर #प्रांत को ले लेते है,
हर क्षेत्र के धन का आकलन आज हम कर ही लेते हैं।
किस प्रांत के वाशिंदे कितने धनी हैं,
किस प्रांत के लोग गरीब मजदूर बने हैं,
इस पर आज फैसला हो ही जाना चाहिए।
इस देश के नागरिकों को बराबर बंट ही जाना चाहिए।
तमिलनाडु में कोई बिहारी तो नहीं मरेगा,
मुंबई में कोई बेचारा भैया तो नहीं बनेगा।
पर ओह, लगता है, इस तराजू में कोई बहुत भारी कमी है
दोनो पलड़े बराबर होकर बोलते हैं,
बंधु, ये किसी प्रांत की नहीं, अपने देश की जमीं है!
चलो यह दृश्य उन लोगों को दिखाते हैं,
जो भाई भाई के दुश्मन हुए जाते हैं।
अब हम तराजू पर जाति को लेते हैं,
किस जाति के लोगों ने किसको कितना सताया!
किस जाति के लोगों ने ये जाति व्यवस्था बनाया!
बिल्कुल पूरा हिसाब होना चाहिए,
पूर्वजों के जाति विभाजन का मामला, आज राफ साफ होना चाहिए।
तो आइए, तराजू के एक तरफ हम जाति को रखते हैं,
और तराजू के दूसरी तरफ, हम कर्म को रखते हैं!
आखिर माप-तौल कर पता कर ही लेते हैं,
देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किसका है!
जाति का या कर्म का?
क्योंकि देश को आगे_बढ़ाना ही तो सबका धर्म है।
पर अब लगता है ये तराजू बिल्कुल ही बेकार है!
तभी तो इसके तौल में,
कर्म_व्यवस्था जाति से ज्यादा वजनदार है!!
इसीलिए छोड़ के ये सारे झगड़े
सारे आपसी “मन और मतभेद”।
चलो ना, देश के नवनिर्माण में
अब हम सब एक साथ हो लेते हैं।
चलो न, आगे बढ़कर एक दूसरे के हाथो में हाथ ले,
हम सभी देशवासी साथ हो लेते हैं।।