M priyadarshini

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बस_बाकी_रहे

बस_बाकी_रहे

अंधियारी रात मे चाँद निकले ना निकले ,

मन में चांदनी चमक बस बाकी रहे!!

दुखो की बदरी में धूप खिले ना खिले,

नयनो में किरणो की दमक बस बाकी रहे!!

सफर में फूलो का गलीचा मिले ना मिले,

पैरो में मंजिल पाने की जिजीविषा बस बाकी रहे!!

रिश्तो में सिक्के की खनक दिखे ना दिखे,

रिश्ते सहेजने की विधा बस बाकी रहे!!

उंचे महल की विरासत जुटे ना जुटे,

मरने पर हमारे सुकर्मो का निशां बस बाकी रहे!!

हम अपनो से रोज मिले न मिले,

दुख-सुख में साथ निभाने की इच्छा बस बाकी रहे!!

कल को काल मिले या समय काल मेरा रहे,

अपनी तकदीर स्वयं लिखने की तमन्ना बस बाकी रहे!!