नमस्कार दोस्तों। आज WorldHeartDay है और इस वर्ष इसका थीम है “Use Heart, Know Heart”, यानी “दिल का उपयोग करें और दिल को जानें”।
तो आइए, इस थीम के संदर्भ में आज हम दिल के कई रूपों के बारे में दिल से बात करते हैं। तो इसी क्रम में, पहले हम डॉक्टर्स से अपने यांत्रिक_दिल के बारे में सुनते हैं। हमारे कार्डियोलॉजिस्ट, इस दिल को सम्हाल कर रखने हेतु शारीरिक व्यायाम, सुबह की सैर करने से लेकर हमारी sedentary जीवन शैली बदलने, खाने पीने में जंक फूड का कम प्रयोग करने, अनावश्यक तनाव से बचने इत्यादि, ना जाने कितनी सलाह देते हैं। उनके अनुसार, अगर हमने अभी से एहतियात नहीं बरती तो हमारे यांत्रिक-दिल महाशय कभी भी बेदिली कर बैठेंगे।
अब जरा आध्यात्मिक भाषा में दिल को समझिए। दोस्तों, कई बार हमारा विज्ञान वाला दिल, यानी यांत्रिक दिल, इस आत्मिक_दिल से पूछता है कि वस्तुतः हूं तो मैं शरीर का एक यंत्र ही जो हमारे शरीर को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु बना है। तो सब मुझे अध्यात्म से क्यों जोड़ते है? फिर हमारा आत्मिक दिल, इस यांत्रिक दिल को हमारे धर्मग्रंथो का वास्ता देता है जिसके अनुसार हर शरीर में आत्मा होती है, जो दिल में बसती है। योग में भी हमारे शरीर में सात चक्रों के जिक्र होते हैं, जिससे हमारे शरीर के क्रियाकलाप निर्धारित होते हैं। हमारे दिल के चक्र को अनाहत_चक्र कहते हैं। जिसपर ध्यान लगाने से हमें compassion, सहानुभूति, करुणा और दैवीय प्यार की अनुभूति होती है। इसीलिए हे यांत्रिक दिल! तुम्हारा एक अहम् हिस्सा मैं भी हूँ।
अब जरा इस दिल को भावनाओं की कसौटी पर देखिए। फिर से ये विज्ञान वाला दिल, भावनात्मक दिल से पूछता है, अब तुम मेरा एक और नया रूप कैसे? अब हमारा इमोशनल दिल जवाब देता है कि हमारी सारी भावनाओं की उत्पत्ति दिल से ही होती है। फिर ये दिल उन emotions को दिमाग के कटघरे में खड़ा करता है, जहां दिल खुद वकील बनता है और हमारा मस्तिष्क जज। अगर हमारा दिमाग अच्छा जज साबित हुआ, तो हमारी वाणी में शब्दो का चयन सुविचारित होगा, जिससे दूसरों की भावनाएं आहत न हो। वहीं अगर हमारे दिमाग ने जज के रूप में पक्षपात कर दिया तो कई बार लोग ऐसे अपशब्द बोल जाते हैं, जिसकी चोट सारे रिश्तों पर भारी पड़ जाती है और इसके प्रभाव हो सकते हैं ताउम्र रह जाएं।
तो आज “विश्व हार्ट डे” पर हम ये प्रण लें कि हम अपने शरीर के यांत्रिक_दिल, आत्मिक_दिल, और भावनात्मक_दिल तीनों का बड़े दिल से ख्याल रखेंगे ताकि हमारा शरीर और रिश्तों की डोर, दोनों चट्टान की तरह मजबूत रहे।