मुझे डर है कि यहां कोई बड़ा-बूढ़ा नही रहता,
कि खाली हाथ वहां से कोई ब्राह्मण लौट आया है!!
नमस्ते दोस्तों। हमारे माननीय बुजुर्ग, जिन्हें हम आजकल सिर्फ सीनियर_सिटीजन समझने लगे हैं, वो दरअसल हमारे पूर्वजों और युवा पीढ़ी के बीच के Connecting Link- संबंधसूत्र हैं। ये सम्माननीय बुजुर्ग ही हमारे मार्गदर्शक हैं तथा पूर्वजों के धरोहर, थाती, सभ्यता एवम संस्कृति के संवाहक हैं। अतः इन्हें सम्मान देने की आवश्यकता है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी प्रेरणा ले सके और अपनी सभ्यता-संस्कृति को प्रायोगिक तौर पर समझ सके।
दोस्तों, सामान्यतः दो प्रकार के धरोहरों की बात हमेशा होती है, मसलन ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर। मेरा मानना है कि एक और महत्वपूर्ण एवं जीवित धरोहर हमारे बीच हैं, हमारे बुजुर्ग, जो थोड़े नजरंदाज हो रहे हैं। हमें इस अनमोल धरोहर को, अपनी इस अमूल्य थाती की सहेजने, संजोने और सम्मान देने की जरूरत है, तभी हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारो को अगली पीढ़ी को संपूर्णता में सौंप पाएंगे।