M priyadarshini

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World Mental Health Day

दोस्तों, आज #world_Mental_Health_Day है। कई बार मैं सोच के बड़ा हैरान होती हूं कि अगर मानसिक रूप से अशक्यता ईश्वर प्रदत्त हो तो उसे ठीक करना तो अपने वश में नहीं है। पर हम स्वयं अपने मन को बीमार कर लें, ऐसा कैसे संभव है? हम सब जानते हैं कि हमारा शरीर एक मशीन की तरह है, जिसका नियंत्रण हमारे दिमाग के हाथो में है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे nervous system के नयूरोंस ना सिर्फ हमारे अंगो को संचालित करते हैं, पर हमें खुश या दुखी करने के सन्देश का नियंत्रण भी उन्ही के हाथ में है। अब देखिए ना, हमारे मन के तंतुओ ने ज्यादा तनाव लिया तो लीजिये, खुद के अन्दर से स्ट्रेस हारमोंस स्रावित हो गए और अब आप उसके परिणाम को झेलते रहिये, जैसे गला सूख गया, ब्लड प्रेशर बढ़ गया, और दीजिये निमंत्रण मधुमेह से लेकर दिल की बीमारियों को।

इसीलिए मुझे लगता है दोस्तो कि जैसे हम अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए Low Fat, Low Cholestrol का खाना खाते है। ठीक वैसे ही हमारे ब्रेन को भी तो अच्छा खाना चाहिए। अच्छी बातें, अच्छी किताबें, अच्छे दोस्त, ताज़ी हवा, शुद्ध पर्यावरण, और सबसे बड़ी बात अच्छी सोच और आत्मविश्वास आदि जैसे dishes से हमारे ब्रेन का स्वास्थ्य निखरता है। अगर हम अहम्, कुसंगति, दूसरों की बुराई जैसी चीज़ें उसे खिलाते रहे तो हमारा ब्रेन depressed क्यूँ नहीं होगा?

जरा एक बात सोचे, अगर ब्रेन हमारा बच्चा है और हम उसके माता पिता। तो बच्चे तो मिटटी खाने को मांगेंगे। उनको तो स्वच्छ और गंदी चीज़ों में कोई फर्क ही नजर नहीं आएगा, तो क्या हम उन्हें उसे खाने देंगे? नहीं ना दोस्तों!! .फिर हम अपने ही ब्रेन के साथ ये ज्यादती क्यूँ करते हैं? जरा सोचियेगा।