M priyadarshini

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नमस्ते दोस्तों। आपसे ये साझा करते अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि मेरे इष्ट बजरंगबली, अपने से बड़ों के आशीर्वाद और आप सबके प्यार के संबल से से आज मेरी जल पर आधारित पुस्तक #जल_माँ प्रकाशित हो गई और जल्द ही ये Amazon और अन्य कई प्लेटफार्म पर उपलब्ध हो जायेगी। ईश्वर की कृपा से इस किताब के लिए मुझे श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज, शारदा पीठ, माननीय श्री #गजेन्द्र_सिंह शेखावत जी, केन्द्रीय #जल_शक्ति_मंत्री, भारत सरकार, माननीय श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, ग्रामीण विकास और इस्पात राज्य मंत्री, भारत सरकार, डा अनुपम हाजरा जी, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय जनता पार्टी के समक्ष शुभकामना संदेश प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत करने का मौका भी मिला। सबने बड़े दिल से इस पुस्तक के लिए आशीर्वाद दिया ।

आइये हम संक्षेप में जल माँ पर बात करते हैं। “संयुक्त राष्ट्र एजेंडा 2030” अनुसार बेहतर जल संसाधन प्रबंधन और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिए, हमें जल की कीमत को समझना एवं उसे सहेजने का प्रयास करना होगा। उनके अनुसार किसी भी चीज की कीमत को निर्धारित करने के तीन दृष्टिकोण हैं; पहला, उसके विनिमय मूल्य के आधार पर, दूसरा उसकी उपयोगिता के आधार पर और तीसरा, उसके भावनात्मक मूल्य के आधार पर। हमें जल के इन सभी मूल्यों को ध्यान में रखकर उसे सहेजने के लिए कार्य करने की जरूरत है तभी हम “जल” के प्रति जागरूक हो सकते हैं। हमने इस किताब में जल के इसी भावनात्मक मूल्य को केंद्र में रखा है।

दोस्तों, एक जल शोधकर्ता, जैव-वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् होने के नाते, मैंने यह महसूस किया है कि हमारे पूर्वजों ने जल को जिस प्राकृतिक तरीके से, हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाकर, जल को स-सम्मान सहेजा है, हमें उनके अनुभवों से सीख कर उसे अपने रोजमर्रा की जिंदगी में उतारने की नितांत आवश्यकता है। तभी हम जल को बचा सकते है। इस किताब की सूत्रधार एक काल्पनिक चरित्र, -“जल-मां” हैं, जो पाठकों और जल के बीच का सम्बन्ध सूत्र हैं। दोस्तों, मेरा आप सभी सुधी जनों से अनुरोध है कि आप भी अपने अन्दर की उस “जल माँ” को जागृत करें और जल को उचित सम्मान दें।