M priyadarshini

आप सबको श्रावण मास की बहुत बहुत शुभकामनाएं

आप सबको श्रावण मास की बहुत बहुत शुभकामनाएं। भोलेनाथ की कृपा आप सब आप बनी रहे।भोलेनाथ का नाम जुबाँ पर आते ही तन मन का सारा मैल धुलने लगता है। हमारे प्रभु है ही ऐसे। खुद महेश है, इनके सखा धनेश ( कुबेर) हैं, इनके श्वसुर पर्वतो के स्वामी हिमालय है। इन्हें भौतिक सुखो की कोई कमी नहीं है। फिर भी ये जंगलो में रहते है। भांग धतूरे का सेवन करते हैं।

उसके बाद भी शिवजी की ऐसी महिमा थी क़ि गौरी जैसी कमसिन लड़की सीधे जंगल में चली गयी तपस्या करने कि मुझे वर के रूप में शिव ही चाहिए वरना मैं ताउम्र कुंवारी रहूंगी। और अब भी अगर पति की चाहत होती है तो आदर्श जोड़ा शिव शिवांगी का माना जाता है। अगर भक्ति की बात करें तो ये श्रीराम की भक्ति में इतने लीन है कि एक बार सती श्रीराम के पास भेष बदलकर सीता बन कर चली गयी थी तो हमारे प्रभु ने उस समय से सती को अपने पत्नी से माँ का दर्जा दे दिया और तभी सती को आत्मदाह करके नया जन्म लेना पड़ा ताकि दुबारा से वो उनकी पत्नी का सम्मान पा सके।

अगर कल्याण की बात करे तो नीलकंठ की महत्ता कौन नहीं जानता है। अगर प्यार की बात करे तो माँ गौरी और भोलेनाथ का प्यार इतना अटूट है जिसमे विरह का कोई स्थान ही नहीं है। जन्म जन्म तक का साथ है इनदोनो का। अब ऐसे स्वामी को पति रूप में कन्याये अगर चाहती हैं तो क्या गलत करती हैं।

पर अगर हम प्रभु शिव की तरह अपने प्यार की कल्पना करते हैं तो हम भी माँ गौरी की तरह क्यूँ ना बनें। उनके पति जंगल में रहते हैं, दिए भी मां गौरी श्मशान की राख लपेटे हुए ,गले में विषधर की माला और वस्त्र के नाम पर बाघ की छाल का कौपीन लपेटे हुए रूद्र के प्यार में ऐसे तल्लीन है क़ि कभी किसी ने सुना भी नहीं कि माँ गौरी ने उनसे शिकायत की है कि मैं राजकुमारी हूँ, मुझे महलो की सम्पन्नता चाहिए, मेरी किस्मत ख़राब क्यों है। क्यूंकि उनकी प्रीत में पावनता है, एक दूसरे के प्रति अटूट समर्पण और विश्वास। तभी वो अर्धनारीश्वर हैं । जय भोलेनाथ।