मेरी किताब: जल_माँ से उद्धृत
जल, जीवनामृत, केवल एक वस्तु नहीं है जिसका हम बाजार में व्यापार कर सकते हैं। इसके महत्व को सिर्फ इसके exchange value aur utility value के आधार पर आंका ही नही जा सकता। जल अमूल्य है, क्योंकि यह पृथ्वी पर सभी प्रकार के जीवन को बनाए रखने के लिए अत्यंत जरूरी है। यह एक ऐसा संसाधन है जिसके बिना हमारा अस्तित्व ही मिट जायेगा, फिर भी इसके महत्व को हम नहीं समझ पा रहे हैं और इसके संरक्षण के प्रति लापरवाह हो रहे हैं। हमने अपने ग्रह पर जल की कमी और इसके प्रदूषण के विनाशकारी प्रभावों को देखा है। जल के कुप्रबंधन और उपेक्षा ने विश्व में अनगिनत पर्यावरणीय आपदाओं को जन्म दिया है, जिससे मानव और वन्य जीवन, दोनों बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। दोस्तों, अब समय आ गया है कि हम जल के सही मूल्य को समझें और इसे बचाने का प्रयास करें।
मैंने अपनी किताब “जल-माँ” में जल के भावनात्मक मूल्य को बताने की कोशिश की है। यह केवल एक संसाधन नहीं है, जिसकी हमें जीवित रहने मात्र के लिए आवश्यकता है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं में भी गहराई से शामिल है एवं उसका वाहक है। हमारे पूर्वजों ने जल के महत्व को समझा और अपने दैनिक जीवन में इसका सम्मान किया। हमें उनके अनुभवों से सीखने और पानी के प्रति इस सम्मान को अपने दैनिक जीवन में उतारने की जरूरत है। हमें जल के प्रति जागरूक होने और जल संरक्षण के लिए सचेत प्रयास करने की आवश्यकता है। अब हम इस कीमती संसाधन के प्रति लापरवाह नहीं रह सकते।
दोस्तों, हमें पानी के भावनात्मक मूल्य को नहीं भूलना चाहिए। यह जीवन का स्रोत है और हमारे अस्तित्व की नींव है। आइए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य संसाधन के संरक्षण के लिए मिलकर काम करें।