M priyadarshini

राष्ट्रीय_विज्ञान_दिवस

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दोस्तो आज विज्ञान दिवस है। #राष्ट्रीय_विज्ञान_दिवस का मूल उद्देश्य है, मेरे समझ से, विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, तकनीकी अनुसंधान और वैज्ञानिक इन्नोवेशन के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना। साथ ही जनसाधारण को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है। अब मैं ठहरी #साइंस की स्टूडेंट। तो मैंने सोचा क्यों ना मैं आज आपलोगों से थोड़ा #DNA के बारे में बात कर लूं।

विज्ञान कहता है कि हर प्राणी का अपना एक #ब्लूप्रिंट होता है जिसे इश्वर ने हमारे सारे कोशिकायों के केंद्र में डीएनए के रूप में छुपाया होता है। #DNA (Deoxy Ribonucleic Acid) एक आनुवंशिक material है जो प्रायः हर सजीव चीज में मौजूद होता है। इसे एक तरह से हमारा #genetic कोड भी कह सकते हैं जो हमारे गुणों को हर संतति में लेकर जाता है। इसी कारण से दादा-दादी, नाना-नानी या माँ-पिता के गुण, संस्कार और चेहरा-मोहरा अपने बच्चो से मिलता-जुलता है।

तो दोस्तो जरा सोचिए, ये #DNA परिवार के हर #generation में गुण-संस्कारों को लेकर जाता है और हमारा इस पर कोई वश नहीं है। पर अपने समाज के DNA पर या अपने विचारो के DNA पर तो हमारा वश है ना दोस्तों?

देखिए हम आज जो भी काम करते हैं; मसलन #प्रकृति का अनावश्यक दोहन करना; नकारात्मक सोच से या बुराइयों से या कट्टरपंथी विचारों से समाज और युवाओं में एक विध्वंशक और अवसादपूर्ण विचार का ताना-बाना बुनना; अपने विचारों और व्यवहारों से भ्रष्टाचार और बेईमानी को स्वीकारोक्ति देकर युवको में ऐसा संदेश देना कि “जैसा चल रहा है वैसा ही बनो वरना सफल नहीं हो सकते या अपना अस्तित्व नहीं बचा सकते” आदि; उसके माध्यम से हम अपने आने वाली पीढ़ी को अपनी इसी सोच का DNA देकर नहीं जा रहे क्या दोस्तों? सोचिएगा।

 

अपने नौनिहालों और अगली पीढ़ी लिए अगर हम सदविचारों और अच्छे संस्कारों का; प्रगतिशील सोच और मानसिकता का; प्रकृति और समाज, जो हमें कितना कुछ देता है, उसके प्रति सकारात्मक कर्तव्यबोध का; अपने-पराये से थोड़ा ऊपर उठकर सामुदायिक साहचर्य का, जो भारतीयता की पहचान है; तथा स्वयं, समाज और देश के प्रति कर्तव्यनिष्ठ नव-पीढ़ी के निर्माण का DNA बनाते, तो अगली पीढ़ी और देश का कल्याण होता। है कि नहीं ?

हम सारी उम्र उनके लिए जैसे-तैसे-कैसे भी पैसे कमाते रहते हैं कि हमारे बच्चे हमारे जाने के बाद सुख से रहेंगे। पर बैंक में पैसे जमा करने से क्या होगा जब उस समाज और उस वातावरण का, जहां उन्हें रहना है, उसके DNA की हमने ऐसी तैसी कर रखी है। उसका क्या? जरा सोचिएगा!

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