M priyadarshini

कालाधन

आजकल जिधर देखिए उधर काले और सफेद धन की बात हो रही है, तो जरा सोचिए धन तो धन है,फिर उसका रंग सफेद या काला क्यों?

काले धन की चर्चा सरेआम होते देख,

दिल में काले धन से रूबरू होने की तमन्ना जागी,

काले धन को उजला करने की,

धनाढ्य सेठो की छटपटाहट देखकर,

मन ने कालेधन पर प्रकाश डालने की इजाजत मांगी

काला धन आखिर है क्या?

धन तो धन है, सौभाग्य और समृद्धि का पूरक,

धन से तो लोग, धन्ना सेठ बन जाते है,

आते-जाते लोग उन्हें सलाम बजाते है।

फिर धन की इस असीम माया पर,

काले रंग का मुलम्मा क्यों?

चमचमाते सिक्को पर,

काले स्याहपन का नित नया अफसाना क्यों?

धन के तो कई रंगबिरंगे रूप हैं!

पुत्रधन हो तो पिता धनवान बन जाता है,

कन्या-धन हो तो कुल, खुशियो से लहलहा जाता है,

विद्या व कला धन हो तो, वो मूल्यवान हो जाता है,

जनधन हो तो, मानव कुटुम्बवान हो जाता है।

अब इन धनो में हम, काला धन किसे कहेंगे?

इन धनी लोगो में, हम सम्मान किनका करेंगे?

बेचारे “धन” की,

इतने यक्ष प्रश्न सुनकर घिग्घी ही बंध गयी,

चमचमाते सिक्को की चमक पर,

अमावस की धूमिल परत चढ़ गयी।

उसने सूखे मुंह से अपनी सफाई दी,

धन तो बेचारा धन है, जो अनमोल और बेरंग है,

वो तो हमारी सोच है, जिसका चढ़ता उसपर रंग है।

सुकर्म से जो अर्जित है, वो धन श्वेत औ धवल है,

पाप से, जो धन संचित है, वो धन छूना अधर्म है।

धन काला है क्यूंकि,

इसमें किसी की पीड़ा,औ दर्द से टपकती आस है।

धन श्यामल है क्यूंकि,

इसमें अशक्य लोगो के, आह की बिलखती सांस है।

तो ऐसे धन का करना क्या,

जो क्षणिक सुख तो दे, पर नींद हराम कर दे।

वैसे धन को संजोना क्या,

जो जब पकड़ा जाए तो इज़्ज़त नीलाम कर दे।

इसीलिए दोस्त!

शुभलक्ष्मी है जहां, वहाँ सुसंस्कारबरकत है,

अशुभ धन है जहां, वहाँ दुर्योग,मन की दरिद्रता औ मुरव्वत है।