M priyadarshini

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Dinkar

आज हिंदी साहित्य के सुप्रसिद्ध राष्ट्रकवि दिनकर जी के पुण्यतिथि के दिन उनके चरणों में मेरा शत् शत् नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।🙏🏻🙏🏻

चाहे वो ओज से भरी रश्मिरथी हो या प्रेम की पराकाष्ठा दर्शाती उर्वशी, चाहे वो किसानों की पीड़ा दर्शाती कृषक कविता हो या परशुराम_की_प्रतीक्षा में छुपा दर्द!! ये कविताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितना उस समय थी। आज के जमाने में कई लोग, जिंदगी में आने वाले संघर्षों से इतने परेशान हो जाते हैं कि उससे लड़ने के बजाय वो जीवन में आत्मघाती कदम उठाने गलत मार्ग चुन लेते हैं। दिनकर जी की इस कविता को देखिए:

“पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड,

झरती रस की धारा अखण्ड

जब फूल पिरोये जाते हैं

हम उनको गले लगाते हैं।

वसुधा का नेता कौन हुआ?

भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ?

अतुलित यश_क्रेता कौन हुआ?

नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ ?

जिसने न कभी आराम किया,

विघ्नों में रहकर नाम किया”

दोस्तो, मेरा मानना है कि असल मायने में दिनकर जी की पुण्यतिथि मनाने की सार्थकता तभी होगी जब हम उनकी रचनाओं से प्रेरणा लें और वो सीख अपनी जिंदगी में उतारें। धन्यवाद 🙏🙏