ये जो शब्द “आप” का हम सब अक्सर प्रयोग करते है, इस “आप:” का मतलब वैदिक संस्कृत में जल होता है। अब जरा एक मायने में सोचे तो अगर हम आपसे बात कर रहे है तो आपके अन्दर निहित जल से मेरी बात हो रही है, क्योकि हमारे शरीर में 70% पानी है। पुराने ज़माने से ही जल को MEDICINE का दर्जा मिला है।
#Nirjhar (निर्झर) पानी का CONCEPT भी वेद के इसी श्लोक से प्रेरित है। हम सबके मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि अगर जल में ही हमारी पूरी बॉडी को निरोग रखने की क्षमता है; कि अगर जल ही लाइफ सेविंग मिनरल्स को, जिसे आजकल दवाईयों की श्रेणी दे दी गयी है, हमारी बॉडी में सम्हाल के रखता है; तो क्या हमें वैसा पानी नहीं पीना चाहिए जिसमें मिनरल्स और पानी के प्राकृतिक तत्व preserved हैं।
क्या वो पानी, जो हमारे taste buds को तृप्ति दे, हमारी आँखों को पारदर्शी (Transparent) और स्वच्छ दिखे, अच्छा पानी है या वो पानी जो हमारे शरीर की हर कोशिका (cell ) की प्यास को दूर करे, हर कोशिका को hydrate करे, अच्छा पानी वो है ?
#युवा कौन?
जिसके दिल में, हर पल एक नई #उमंग हो
जिसके नैनो में, हर क्षण नए सपनो की #तरंग हो
जिसके मन में, नित दिन एक नई आशा व #जिज्ञासा हो
जिसके उर में, ना ही कोई #नैराश्य औ ना #पाशविक पिपासा हो।
युवा कौन?
जिसके लहू में, देश प्रेम की #सुलगती आग हो
जिसकी आंखों में, नारी के लिए असीम #सम्मान हो
जिसकी सोच में, जात-पात का ना कोई #भेदभाव हो
जिसकी रगों में, सभी धर्मों के लिए #इज्जत और #सद्भाव हो।
युवा कौन?
जिसके कर्मों पर, कुल और देश को नाज हो
जिसके लिए, निज स्वार्थ से बढ़कर समाज हो,
जो “मैं” “तुम” से बढ़कर, “हम” को प्रश्रय दे,
जो दीन दुखियो का दर्द समझे, और उन्हे आश्रय दे।
युवा वो नहीं, जो सिर्फ उम्र से बस जवान हो,
युवा वो नहीं, जो #अमर्यादित, #बदजुबान हो
युवा वो नहीं, जो अपनी करनी से समाज को नाश दे,
युवा वो नहीं, जो अपने #कुकर्मों से कुल को संताप दे,
युवा वो नहीं, जो चंद पैसे के लिए #जमीर को बेच दे,
युवा वो नहीं, जो क्षणिक खुशी के लिए दीन ईमान त्याग दे।