नमस्ते दोस्तों। दिनांक 28 जुलाई, 2025, को “इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन – IIA” के तत्वाधान में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI), भारत सरकार, के सहयोग से IIA दिल्ली चैप्टर की मेजबानी में “The Impact of Pradhan Mantri Kisan SAMPADA Yojana: From the Perspective of North India” विषय पर “इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली” में
एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एक प्रतीकात्मक जलसंरक्षण संकल्प से हुई, जो इस बात को रेखांकित करता है कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्थिरता और संसाधनों के विवेकपूर्ण एवं संवेदनशील उपयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
IIA दिल्ली चैप्टर की चेयरपर्सन के नाते मुझे इस अवसर पर स्वागत भाषण देने का अवसर मिला। अपने स्वागत भाषण में मैंने कहा कि यह संगोष्ठी नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच संवाद को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस मंच के माध्यम से हम नीति और व्यवहार के बीच की खाई को पाटना चाहते हैं। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना में ग्रामीण आजीविका को रूपांतरित करने की अपार क्षमता है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उद्योग जगत इसे ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी ढंग से अपनाता है।
इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि माननीय केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, श्री चिराग पासवान जी ने संगोष्ठी में उपस्थित उद्यमियों और मीडिया बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना” केवल एक वित्तीय सहयोग प्रणाली नहीं है, बल्कि यह भारत की कृषि की रीढ़ को मज़बूत करने का एक रणनीतिक औजार है। उन्होंने ज़ोर दिया कि यह योजना छोटे एवं मझोले उद्यमों (MSME) को सशक्त करने, फसल की बर्बादी को घटाने और किसानों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है। माननीय मंत्री जी ने हमें आश्वस्त किया कि IIA द्वारा प्रस्तुत हितधारकों की जमीनी चुनौतियों को उन्होंने गंभीरता से संज्ञान में लिया है और मंत्रालय स्तर पर इन समस्याओं के व्यावहारिक समाधान निकालने हेतु ठोस प्रयास किए जाएंगे।
श्री अनुज गर्ग जी (IIA CEC सदस्य) ने “One District One Product” (#ODOP) पहल के ज़रिए क्षेत्रीय उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि हम स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें अवसंरचना को भी उसी स्तर पर उन्नत करना होगा।
IIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दिनेश गोयल जी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि IIA सरकार और उद्योग के बीच सेतु के रूप में कार्य करता रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ज़िला स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसियों और उद्यमियों के बीच नियमित फीडबैक तंत्र विकसित होना चाहिए, जिससे योजना के परिणामों की गुणवत्ता बढ़ाई जा सके।
अंत में, DrLakshmikant Pandey जी (CEC सदस्य) ने सभी वक्ताओं, मंत्रालय और विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। जय हिंद।
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