दोस्तों आज World_Alzheimer’s Day है। इस बीमारी में, धीरे धीरे दिमाग की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं और उस इंसान की याददाश्त और सोचने की शक्ति क्षीण होने लगती है। रोजमर्रा की चीजें रखकर भूल जाना आम बात है पर फिक्र तब होनी चाहिए जब कोई अपने परिवारजनों, जरूरी तारीख या महत्वपूर्ण घटना को भूलने लगे। विज्ञान कहता है, हमारा ब्रेन बड़ा जटिल होता है जिसमे कई memory_traces होते हैं।इन्ही traces में हमारे भूलने और याद रखने की कहानी छिपी होती है। जब हम एक ही चीज को कई बार पढ़ते हैं, visualise करते या सुनते हैं तो उन Traces पर इन बातो की धारियां बन जाती हैं। फिर हम उन बातो को भूल नहीं पाते।कहते हैं बचपन में क्युकि हमारे मस्तिष्क के सेल मजबूत होते हैं इसीलिए बचपन की बाते हमें ज्यादा याद रहती है.लेकिन जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, और हमारे ब्रेन के तंतु कमजोर होने लगते है तो हमारी याददाश्त कमजोर होने लगती है। इसीलिए कहा जाता है कि हमे अपने शरीर के व्यायाम के साथ साथ ब्रेन की भी एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके लिए कई लोग बिना कैलकुलेटर के कैलकुलेशन, sudoku,शतरंज या दिमाग से रिलेटेड कोई न कोई एक्टिविटी जरूर करते हैं जिससे ब्रेन के तंतुओं (nerves) को काम मिलता रहे।
ये तो थी डॉक्टर्स की बातें। चलिए आज के दिन क्या_भूलूं क्या_याद_करूं वाले गाने की तर्ज पर हम भी अपने ब्रेन की एक एक्टिविटी करते हैं। और सोचते हैं कि हमे भूलना क्या चाहिए? मुझे भूलना हो तो मैं भूलूंगी अपनी कुप्रथाओं को, कुरीतियों को, अपने कुछ युवाओं की दिशाहीनता को, अपने प्रदेश के बाहर विस्थापित बिहारी_GDP( GARIB MAJDOOR DIHADI PAR, गरीब मजदूर दिहाड़ी पर) को और याद रखूंगी अपने पूर्वजों द्वारा सौंपे गए अपने संस्कारो को,अपने प्रदेश की अमूल्य धरोहरों को, अपनी परंपराओं को, अपने युवाओं और युवतियों की प्रतिभा को जो देश विदेश में जाकर अपने ज्ञान का परचम लहराते हैं।