नमस्कार दोस्तो। आज सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या है l इस दिन धरती पर आए पितरों को याद कर उन्हें विदाई दी जाती है। कहा जाता है कि कौआ के द्वारा खाया गया भोजन सीधे पितरों को प्राप्त होता है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान कौवों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। पर हम प्रकृति से इतने दूर होते जा तहे है कि गांवों में तो कौवे महाशय के दर्शन भी हो जाते हैं पर शहरो में तो लोगो को ये यदा कदा ही मिलते हैं। दोस्तो, कौवों का इंसानों से बहुत पुराना रिश्ता है ,चाहे किसी अतिथि का आना हो,या पिंडदान के समय पितरो को आमंत्रण देना, हम इन सब से कौवे को ही relate करते हैं।पक्षी वैज्ञानिक कहते हैं कि कौवा पक्षिओ में सबसे बुद्धिमान पक्षी माना जाता है और इसकी याददाश्त बहुत तेज होती है। इसने एक बार जिसका चेहरा देख लिया,उसे सालो साल वो चेहरा याद रहता है ।
कई बार मैं कौवे को देखकर सोचती हूं, एक तो कौवे का रंग काला, दूसरा उसकी आवाज भी कर्कश और तीसरा उसके खाने की भी कोई choice नहीं है। फिर भी उसे इश्वर से कोई शिकायत नही है।और तो और इसकी सामाजिकता देखिए, एक कौवे की मृत्यु हो जाए तो सारे कौवे उसके इर्द गिर्द भीड़ लगा देते है ।और एक हम इंसान है, हमे सब कुछ मिला है फिर भी हमें अक्सर सुख_रोग ही रहता है । वो मेरे से बड़ा क्यूँ? उसके पास इतना ज्यादा और मेरे पास कम क्यूँ? और आजकल इंसानों की असंवेदनशीलता देखिए, सड़क पर कोई शव पड़ा हो हो उसके साथ या तो फोटो खींचेंगे या थोड़ी और जहमत की तो उसे #लावारिस करार करके नगर पालिका को फ़ोन लगा देंगे। और देखिये ,कौवे के घोसले में कोयल चुपचाप से अंडे दे जाती है और कौवे के अंडे को तोड़ कर फेंक देती है कि कौवा उसे पहचाने नहीं । क्यूंकि कोयल को पता है कि कौवा अपने बच्च्चो से बिना कोई उम्मीद लगाये भी उनकी बड़ी अच्छी परवरिश कर देगा। और हमें अपने हर रिश्ते से उम्मीद लगी रहती है कि ये मेरा साथ दे।
इसीलिए दोस्तों ,जब समस्त कमियों के बाबजूद कौवे ऐसे हो सकते है तो हम सब क्यों नहीं। इसीलिए पितृ पक्ष में कौवे को भोजन कराने के साथ साथ क्यों न हम उनके इन गुणों से कुछ प्रेरणा भी लें लें।
जरा सोचिएगा और बताइएगा जरूर।