M priyadarshini

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CIRCADIAN RHYTHM

दोस्तों, कल मेरी एक डॉक्टर से नींद और अनिद्रा की समस्या को लेकर बात हो रही थी। इसी क्रम में हम इंसानों के बॉडी_clock, सरकेडियम cycle और रिदम का जिक्र हुआ जिसपर आज मैं बात करूंगी।

दोस्तों, सरकेडियन’ लैटिन भाषा, सरका_डायम’, से आया है जिसका मतलब ‘पूरे दिनभर में’ होता है। क्या आपने गौर किया है कि हमें अगर अच्छी नींद ना मिले, तो हम चिड़चिड़े हो जाते हैं और कुछ करने को जी नही करता? अगर दूसरे देश में अगर जाएं जहां का समय हमसे आगे या पीछे है, तो जेट lag होता है। इसका कारण क्या है?

दोस्तों, यही “सरकेडियन रिदम” है। बड़ी अचंभे की बात है कि ईश्वर ने हमारे शरीर में भी 24 घंटे टिक टिक करने वाली घड़ी फिट कर रखी है जो पर्यावरण और प्रकाश के बदलने पर हमारी नींद और उठने के समय का ध्यान रखती है। लगभग 20,000 तंत्रिका कोशिकाएं हमारी”मास्टर_घड़ी” बनाती हैं।अगर हमारा शरीर इस लय में हुआ तो हम पूरे दिन एक्टिव रहेंगे । रात में, हमारा मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से नींद महसूस करना शुरू कर देगा है, जिसने संकेत दिया कि अब आराम करने का वक्त हो गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर शरीर इस रिदम में है तो हमारे मस्तिष्क में मेलाटोनिन हारमोन स्वाभाविक रूप से बनता है। जब आंखों को सूर्य से प्रकाश मिलता है, तो मेलाटोनिन बनना बंद हो जाएगा और हम जागे रहेंगे । जब आंखों को प्रकाश नहीं मिलेगा तो ये महाशय हमारे रक्त में स्रावित होने लगेंगे और हमे नींद आयेगी।डॉक्टर कहते हैं कि प्रकाश इस हार्मोन का दुश्मन है। आजकल आधुनिकता के दौर में देर से सोना और सुबह देर से उठने को के चक्कर में अपने सिर्कडियम रिदम की ऐसी तैसी कर डालते है और बाद में जब नींद नही आने की शिकायत होती है तो लीजिए खाइए ,मेलाटोनिन की गोली जिसके कई साइड इफेक्ट हैं।।वैज्ञानिक कहते हैं कि कई दिनों तक नींद को नजरअंदाज करके सर्कैडियन लय को तोड़ने की कोशिश करता है, तो कई बीमारियों घर करने लगती हैं।

दोस्तो, अब देखिए ना, जब हमारे बॉडी ने संदेश दिया कि मैं बीमार हूं तो हम उसका इलाज कराने को डॉक्टर के पास जाते हैं। पर रोज हमारी बॉडी के घड़ी की टिक टिक हमे, अपनी दिनचर्या ठीक करने, सही समय पर सोने जागने और circadian रिदम की बात सुनाती है तो हम उसे क्यों नजरंदाज करते हैं?

जरा सोचिएगा