नमस्कार दोस्तों। कल अखबार की सुर्खियों में एक खबर थी कोटा में लगातार हो रहे बच्चो के सुसाइड की।बड़े अरमानों से बच्चो के सुनहरे भविष्य की आस लगाए parents अपने बच्चो को अपने से दूर भेजते हैं । पर कई बार बच्चे जब मानसिक तनाव नहीं झेल पाते तो अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं। फिर इसमें सब कभी बच्चो तो कभी मां बाप पर दोषारोपण करते रहते हैं ,बिना ये सोचे कि मां पिता ने बच्चो के लिए कभी बुरा तो सोचा नहीं होगा या ऐसा भी नहीं होगा कि वो अपने बच्चो से प्यार नहीं करते होंगें। बच्चे क्योंकि अबोध होते हैं तो गलती उनकी भी नही हो सकती।तो समस्या कहा हैं, क्यों आए दिन ऐसा हो रहा है? हमसब के लिए अपने देश के नौनिहालों को ऐसा खोना बड़ा शर्मनाक है।
दोस्तों, बच्चो का मन निर्मल होता है है। जिस प्रकार से पौधे अपने जड़ से जैसा खाद-पानी ग्रहण करते हैं वैसे ही उनकी growth होती है। ठीक उसी तरह हमारे नौनिहालों का मन, चेतन या अवचेतन, जैसी चीज़ें अपने आसपास के परिवेश, माता पिता और गुरुओ से ग्रहण करता है, उनकी भावनाएं भी वैसी ही हो जाती है। दोस्तों, कही पढ़ा था मैंने कि एक आदमी खेतो में भिन्डी तोड़ रहा था तो रोज उसे उसका मालिक कहता था कि “बच्च” (बच्चा) नहीं मारना। उस आदमी ने एक दिन अपने मालिक से पूछा कि ऐसा आप क्यों बोलते हो? तो मालिक ने कहा कि कम से कम इन्हें अपनी उम्र तो पूरी करने लेने दो फिर तोड़ लेना।
हमारे आस पास कई लोग, कुछ नेतागण, समाज के कुछ तथाकथित हिमायती लोग या TRP के भूखे कुछ पीत पत्रकार, जाने या अनजाने, रोज उलुल-जुलूल विषयों पर चटपटी बातें परोसते हैं। जात-पात, समाज की कुरीतियों और विसंगतियों को और कितनी तरह के नफरत के बीज बढ़ा चढ़ाकर इन छोटे पौधों के दिमाग के जड़ो में डालते हैं और फिर आशा करते है कि हमारी ये आने वाली पीढ़ी बिलकुल स्वस्थ मानसिकता की हो!! हम सब तो बड़े हैं दोस्तों। हमें अपना भला बुरा का पता होता है। पर वो अपरिपक्व और निश्छल बच्च (बच्चे), जिन्होंने जिंदगी के उतार-चढाव भरे रास्ते पर अभी चलना भी नहीं सीखा, उन्हें हम अपने स्वार्थपूर्ति के लिए कंटक भरे रास्तो पर क्यों ले जा रहे हैं? तो इसके परिणाम स्वरूप “बच्च” ही तो मरेगा ना !!
किसी निर्दोष की हत्या पर तो हमारे यहाँ कोर्ट में सजाये मौत का फरमान मिलता है, पर जो इन नौनिहालों को रोजाना slow poison दे कर बच्च मारने का अपराध कर रहे हैं, उनका क्या? सारी दुनिया अपनी; ये प्रकृति अपनी; बच्चे इस दुनिया के फूल; हम आप इस दुनिया में इश्वर द्वारा appointed माली तो हमारा फर्ज नही बनता कि हम इन मासूम फूलो को स्वस्थ वातावरण में सुगंधित होकर खिलने दें।