M priyadarshini

FICCI

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नमस्कार दोस्तों। कल मुझे FICCI (Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry) के द्वारा The Lalit Hotel, Delhi, में आयोजित कार्यक्रम, “Power of Allyship in Advancing Women’s Leadership”, में शिरकत करने का मौका मिला। FICCI, भारत के व्यापारिक संगठनों का एक महत्वपूर्ण संघ है जिसकी स्थापना 1927 में हुई थी। इस कार्यक्रम में औद्योगिक क्षेत्र और व्यवसाय में महिलाओं की सहभागिता कैसे सुनिश्चित की जाए; कैसे उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में मित्रवत और अनुकूल वातावरण मिले जिससे उनकी क्षमता और कार्यकुशलता प्रभावित ना हो? महिलाएं कैसे व्यावसायिक संस्थाओं में अग्रणी भूमिका में रहकर उस संस्था और देश की प्रगति में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं; उनकी career growth आने वाली परेशानियाँ और उससे कैसे उबरा जाए; सरकारी या गैरसरकारी संस्थाओं में उच्च स्तर पर बैठे हुए लोग, कैसे अपनी संस्थाओं में महिलाओं को उनकी प्रोफेशनल क्षमता और कार्यकुशलता के आधार पर उन्हें सुरक्षित व्यवसायिक वातावरण प्रदान कर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं; आदि विषयों पर बड़ी विस्तार से चर्चा हुई। भारत के कॉरपोरेट सेक्टर और गवर्नमेंट सेक्टर की अग्रणी संस्थाओं के शीर्ष पदों पर पदस्थापित महिलाओं ने उपरोक्त विषयों पर अपने-अपने अनुभव साझा किए और New Women Leaders को आगे आने के लिए प्रेरित किया। इनमें प्रमुख थीं, श्रीमती शिरीन भानजी (CNBC), श्रीमती मोनिका हालन (Author), श्रीमती निधि शुक्ला (President, Girl Rising), श्रीमती कांता सिंह जी (Deputy Country Representative, United Nation Woman), श्रीमती अंकिता बनर्जी (Rand Stad India), श्रीमती शुभ्रता प्रकाश (IRS, Commisioner of Income Tax), श्रीमती पूनम त्यागी (GM, The Lalit Suri Hospitality Group), श्रीमती प्रीता अत्रे (Twitter) इत्यादि।

दोस्तों, बिहार के ग्रामीण परिवेश से महानगर तक और पुनः बिहार के गाँवो तक का मेरे 20-22 वर्षों के PROFESSIONAL & SOCIAL JOURNEY, जिसमें कॉरपोरेट सेक्टर में एक सफल महिला उद्यमी, स्टार्टअप फाउंडर, Executive Committee Member & Chapter Convenor (Indian Industries Association), Chairman & Executive Committee Member (Different Social Organisations) तथा बिहार के राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्रों में अलग अलग मुद्दों, मसलन कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यटन विकास, धरोहर संरक्षण, रोजगार सृजन आदि, पर कार्य करने के दौरान मेरे व्यक्तिगत अनुभवों से मुझे ऐसा लगता है कि पुरुष और महिलाएं, दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अतः दोनों अगर एक साथ मिलकर सकारात्मक और सुरक्षित माहौल में कार्य करें, तो भारत को विकासशील से विकसित देश बनने से कोई रोक नहीं सकता। बस जरुरत है पुरुषो द्वारा महिलाओं को पारिवारिक और व्यावसायिक, दोनों मोर्चों पर decision making में बाइज्जत शामिल करने की तथा महिलाओं के CALIBRE को इज्जत देकर उनके Leadership को वैसे ही स्वीकार करने की जैसे पुरुषों को स्वीकार करते हैं। इतिहास गवाह है दोस्तों, कि महिलाओं को जब-जब और जहाँ-जहाँ अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिला है, उन्होंने उसमें देश का नाम रोशन ही किया है। सोचिएगा इस विषय पर। धन्यवाद।

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