“जल ही जीवन है”, ये तो हम सबने कई बार सुना है और अगर इन पंक्तियों को अपने जीवन में उतार कर जल को सहेजना भी शुरू कर दें तो हमें और हमारी अगली पीढ़ी को भविष्य में आने वाले #जल_संकट से एक हद तक निजात मिल जाएगी। हमारे प्राचीन वेद, ऋग्वेद, के “आपो देवता सूक्त ४७” में संस्कृत में एक श्लोक है:
“आपः पृणीत भेषजं, वरुथं तन्वे मम।। ज्योक् च सूर्यं दृशे।।”
जिसका शब्दार्थ है कि हे जल समूह! आप जीवनरक्षक औषधियों को हमारे शरीर में स्थित करें, जिससे हम निरोग होकर हमेशा सूर्यदेव का दर्शन करते रहें।
ये जो शब्द “आप” का हम सब अक्सर प्रयोग करते है, इस “आप:” का मतलब वैदिक संस्कृत में जल होता है। अब जरा एक मायने में सोचे तो अगर हम आपसे बात कर रहे है तो आपके अन्दर निहित जल से मेरी बात हो रही है, क्योकि हमारे शरीर में 70% पानी है। पुराने ज़माने से ही जल को MEDICINE का दर्जा मिला है।
#Nirjhar (निर्झर) पानी का CONCEPT भी वेद के इसी श्लोक से प्रेरित है। हम सबके मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि अगर जल में ही हमारी पूरी बॉडी को निरोग रखने की क्षमता है; कि अगर जल ही लाइफ सेविंग मिनरल्स को, जिसे आजकल दवाईयों की श्रेणी दे दी गयी है, हमारी बॉडी में सम्हाल के रखता है; तो क्या हमें वैसा पानी नहीं पीना चाहिए जिसमें मिनरल्स और पानी के प्राकृतिक तत्व preserved हैं।
क्या वो पानी, जो हमारे taste buds को तृप्ति दे, हमारी आँखों को पारदर्शी (Transparent) और स्वच्छ दिखे, अच्छा पानी है या वो पानी जो हमारे शरीर की हर कोशिका (cell ) की प्यास को दूर करे, हर कोशिका को hydrate करे, अच्छा पानी वो है ?
4.
Heading : युवा कौन है ?#युवा कौन?
जिसके दिल में, हर पल एक नई #उमंग हो
जिसके नैनो में, हर क्षण नए सपनो की #तरंग हो
जिसके मन में, नित दिन एक नई आशा व #जिज्ञासा हो
जिसके उर में, ना ही कोई #नैराश्य औ ना #पाशविक पिपासा हो।
युवा कौन?
जिसके लहू में, देश प्रेम की #सुलगती आग हो
जिसकी आंखों में, नारी के लिए असीम #सम्मान हो
जिसकी सोच में, जात-पात का ना कोई #भेदभाव हो
“जल ही जीवन है”, ये तो हम सबने कई बार सुना है और अगर इन पंक्तियों को अपने जीवन में उतार कर जल को सहेजना भी शुरू कर दें तो हमें और हमारी अगली पीढ़ी को भविष्य में आने वाले #जल_संकट से एक हद तक निजात मिल जाएगी। हमारे प्राचीन वेद, ऋग्वेद, के “आपो देवता सूक्त ४७” में संस्कृत में एक श्लोक है:
“आपः पृणीत भेषजं, वरुथं तन्वे मम।। ज्योक् च सूर्यं दृशे।।”
जिसका शब्दार्थ है कि हे जल समूह! आप जीवनरक्षक औषधियों को हमारे शरीर में स्थित करें, जिससे हम निरोग होकर हमेशा सूर्यदेव का दर्शन करते रहें।
ये जो शब्द “आप” का हम सब अक्सर प्रयोग करते है, इस “आप:” का मतलब वैदिक संस्कृत में जल होता है। अब जरा एक मायने में सोचे तो अगर हम आपसे बात कर रहे है तो आपके अन्दर निहित जल से मेरी बात हो रही है, क्योकि हमारे शरीर में 70% पानी है। पुराने ज़माने से ही जल को MEDICINE का दर्जा मिला है।
#Nirjhar (निर्झर) पानी का CONCEPT भी वेद के इसी श्लोक से प्रेरित है। हम सबके मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि अगर जल में ही हमारी पूरी बॉडी को निरोग रखने की क्षमता है; कि अगर जल ही लाइफ सेविंग मिनरल्स को, जिसे आजकल दवाईयों की श्रेणी दे दी गयी है, हमारी बॉडी में सम्हाल के रखता है; तो क्या हमें वैसा पानी नहीं पीना चाहिए जिसमें मिनरल्स और पानी के प्राकृतिक तत्व preserved हैं।
क्या वो पानी, जो हमारे taste buds को तृप्ति दे, हमारी आँखों को पारदर्शी (Transparent) और स्वच्छ दिखे, अच्छा पानी है या वो पानी जो हमारे शरीर की हर कोशिका (cell ) की प्यास को दूर करे, हर कोशिका को hydrate करे, अच्छा पानी वो है ?
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Heading : युवा कौन है ?#युवा कौन?
जिसके दिल में, हर पल एक नई #उमंग हो
जिसके नैनो में, हर क्षण नए सपनो की #तरंग हो
जिसके मन में, नित दिन एक नई आशा व #जिज्ञासा हो
जिसके उर में, ना ही कोई #नैराश्य औ ना #पाशविक पिपासा हो।
युवा कौन?
जिसके लहू में, देश प्रेम की #सुलगती आग हो
जिसकी आंखों में, नारी के लिए असीम #सम्मान हो
जिसकी सोच में, जात-पात का ना कोई #भेदभाव हो