देशकेनवनिर्माणमेंअबहमस।
चलो ना अब बांट ही लेते हैं !!हर धर्म को, हर जाति को, हर प्रांत
चलो ना अब बांट ही लेते हैं !!हर धर्म को, हर जाति को, हर प्रांत
ये जो शब्द “आप” का हम सब अक्सर प्रयोग करते है, इस “आप:” का मतलब
“जल ही जीवन है”, ये तो हम सबने कई बार सुना है और अगर इन
गर्व से कहो कि मैं किसान हूं!!हां, मैं किसान हूँ!!धरती को हल से चीरकर,हर बीज
एक ही #देश है, एक ही माटी,हम सब हैं, बस #भारतवासी !किसान कहो या कहो मजदूर,चाहे हो कोई, कितना